Part-2 :- “क्रिकेट इतिहास के 15 ऐसे वर्ल्ड रिकॉर्ड जिन्हें जानकर आप हैरान रह जाएंगे!”
6. लगातार 16 टेस्ट जीत:-
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| ऑस्ट्रेलियाई टीम अपनी लगातार 16वीं टेस्ट जीत की ऐतिहासिक उपलब्धि का जश्न मनाती हुई। |
- रिकॉर्ड धारक: ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम।
- पहली बार (16 जीत): 14 अक्टूबर 1999 से 27 फरवरी 2001 (कप्तान: स्टीव वॉ)।
- दूसरी बार (16 जीत): 26 दिसंबर 2005 से 2 जनवरी 2008 (कप्तान: रिकी पोंटिंग)।
- रिकॉर्ड तोड़ने वाली टीम: भारत ने 2001 के ऐतिहासिक कोलकाता टेस्ट (ईडन गार्डन्स) में स्टीव वॉ की टीम को हराकर यह सिलसिला तोड़ा था।
टेस्ट क्रिकेट में लगातार 16 मैच जीतना बेहद मुश्किल है।
7. सबसे तेज टेस्ट शतक:-
क्रिकेट का सबसे तूफानी शतक: ब्रेंडन मैकुलम
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ऐतिहासिक पारी
2016 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने विदाई टेस्ट मैच में मैकुलम ने क्राइस्टचर्च के मैदान पर तहलका मचा दिया। उन्होंने मात्र 54 गेंदों में अपना शतक पूरा कर सर विवियन रिचर्ड्स और मिस्बाह-उल-हक (56 गेंद) के संयुक्त रिकॉर्ड को तोड़ दिया। मैकुलम की इस पारी की खासियत यह थी कि उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की बखिया उधेड़ते हुए मैदान के चारों ओर शॉट्स लगाए।
रिकॉर्ड के आंकड़े
गेंदें: 54
कुल रन: 145 (79 गेंद)
चौके/छक्के: 21 चौके और 6 छक्के
स्ट्राइक रेट: 183.54
मैकुलम की यह पारी न केवल एक रिकॉर्ड थी, बल्कि टेस्ट क्रिकेट में आक्रामक 'बैजबॉल' (Bazball) शैली की एक शुरुआती झलक भी थी। उनकी इस बेखौफ बल्लेबाजी ने साबित कर दिया कि टेस्ट क्रिकेट में भी टी-20 जैसा रोमांच पैदा किया जा सकता है। आज भी यह रिकॉर्ड अटूट है और क्रिकेट प्रेमियों के जेहन में ताजा है।
8. एक ओवर में 36 रन:-
1985 में Ravi Shastri ने रणजी ट्रॉफी में एक ओवर में 6 छक्के लगाकर 36 रन बनाए।
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| 1985 में वानखेड़े स्टेडियम में रवि शास्त्री ने तिलक राज के एक ओवर में 6 छक्के जड़कर इतिहास रचा था। |
1985 का साल भारतीय क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ, जब रवि शास्त्री ने रणजी ट्रॉफी में एक ओवर में 6 छक्के लगाकर इतिहास रच दिया। यह उपलब्धि क्रिकेट की दुनिया में एक मील का पत्थर बन गई और शास्त्री का नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया।
इस लेख में, हम रवि शास्त्री की इस असाधारण उपलब्धि के पीछे की कहानी पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
वानखेड़े स्टेडियम में आतिशबाजी
यह यादगार मैच बड़ौदा और बॉम्बे (अब मुंबई) के बीच 19 जनवरी 1985 को वानखेड़े स्टेडियम, मुंबई में खेला जा रहा था। शास्त्री, जो बॉम्बे टीम की कप्तानी कर रहे थे, पहली पारी में 100 रन बनाकर नाबाद थे।
वह ओवर जिसने क्रिकेट जगत को चौंका दिया
बड़ौदा के स्पिनर तिलक राज को उस ओवर में गेंदबाजी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। शास्त्री, जो पहले से ही आक्रामक मूड में थे, ने पहली ही गेंद को सीमा पार भेज दिया। अगली गेंद पर भी उन्होंने जोरदार छक्का लगाया। दर्शकों का उत्साह बढ़ता जा रहा था। शास्त्री ने तीसरी गेंद को भी दर्शकों के बीच में पहुँचाया। तिलक राज दबाव में आ गए थे, और शास्त्री ने इसका पूरा फायदा उठाते हुए चौथी गेंद पर भी छक्का लगाया।
एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड की स्थापना
पांचवीं गेंद पर, शास्त्री ने एक और छक्का लगाकर अपना दोहरा शतक पूरा किया। तिलक राज की छठी गेंद भी शास्त्री के बल्ले से बच नहीं पाई और उन्होंने एक शानदार छक्का लगाकर क्रिकेट के इतिहास में एक ही ओवर में छह छक्के लगाने वाले पहले खिलाड़ी बन गए। यह कारनामा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में तो नहीं था, लेकिन यह रणजी ट्रॉफी के इतिहास में एक अविश्वसनीय रिकॉर्ड था।
रवि शास्त्री की विरासत
रवि शास्त्री का एक ओवर में 6 छक्के लगाने का रिकॉर्ड क्रिकेट की दुनिया में हमेशा याद किया जाएगा। यह उपलब्धि उनकी आक्रामक बल्लेबाजी और दृढ़ता का एक प्रमाण है। यह रिकॉर्ड आज भी क्रिकेट प्रेमियों को प्रेरित करता है।
9. एक ओवर में 6 छक्के (अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट):-
युवराज सिंह: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 6 छक्कों का ऐतिहासिक कारनामा
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| डरबन के किंग्समीड स्टेडियम में युवराज सिंह ने एक ओवर में 6 छक्के जड़कर अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट में नया कीर्तिमान रचा। |
19 सितंबर 2007, डरबन का मैदान और आईसीसी टी20 विश्व कप का पहला संस्करण। यह दिन क्रिकेट इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया, जब युवराज सिंह ने इंग्लैंड के खिलाफ एक ओवर में 6 छक्के जड़कर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। यह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के किसी भी प्रारूप में एक ओवर में 6 छक्के लगाने का पहला अवसर था (टी20आई में)।
एंड्रयू फ्लिंटॉफ के साथ बहस और ब्रॉड पर कहर
इस ऐतिहासिक पल से ठीक पहले, युवराज की इंग्लैंड के ऑलराउंडर एंड्रयू फ्लिंटॉफ के साथ तीखी बहस हुई थी। फ्लिंटॉफ के उकसावे ने युवराज के अंदर आग भर दी, और इसका खामियाजा भुगतना पड़ा युवा गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड को।
अगले ही ओवर (पारी के 19वें ओवर) में, युवराज ने ब्रॉड की छह गेंदों को मैदान के हर कोने में सीमा पार भेजा। यह कोई तुक्का नहीं था, बल्कि क्रिकेट की शुद्ध आक्रामकता और टाइमिंग का एक असाधारण प्रदर्शन था।
विश्व रिकॉर्ड और जीत की नींव
युवराज के इन छह छक्कों ने न केवल एक विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया, बल्कि भारत की जीत की नींव भी रखी। उन्होंने मात्र 12 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया, जो टी20 क्रिकेट में आज भी सबसे तेज अर्धशतक का रिकॉर्ड है। भारत ने यह मैच जीतकर सेमीफाइनल में जगह बनाई और अंततः टूर्नामेंट जीता।
युवराज सिंह का यह कारनामा न केवल एक रिकॉर्ड है, बल्कि यह एक खिलाड़ी की मानसिक दृढ़ता और दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता का एक उदाहरण भी है। उनके 6 छक्कों की गूंज आज भी क्रिकेट प्रेमियों के जेहन में ताजा है।
उन्होंने 2007 के ICC T20 World Cup 2007 में एक ओवर में 6 छक्के लगाए।
10. वनडे में सबसे ज्यादा विकेट
वसीम अकरम: वनडे क्रिकेट के 'सुल्तान ऑफ स्विंग' और 502 विकेटों का साम्राज्य
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| 'सुल्तान ऑफ स्विंग' वसीम अकरम: दुनिया के पहले गेंदबाज जिन्होंने वनडे क्रिकेट में 500 विकेट का जादुई आंकड़ा पार कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। |
यह रिकॉर्ड Wasim Akram के नाम लंबे समय तक रहा और उन्होंने 502 विकेट लिए। पाकिस्तान के महान तेज गेंदबाज वसीम अकरम को क्रिकेट जगत में 'सुल्तान ऑफ स्विंग' के नाम से जाना जाता है। वनडे अंतरराष्ट्रीय (ODI) क्रिकेट में उन्होंने एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया था, जो दशकों तक अटूट रहा। अकरम दुनिया के पहले गेंदबाज थे जिन्होंने वनडे क्रिकेट में 500 विकेट का जादुई आंकड़ा पार किया था।
एक ऐतिहासिक उपलब्धि
वसीम अकरम ने अपने शानदार करियर में कुल 356 वनडे मैच खेले और 502 विकेट चटकाए। उनका यह रिकॉर्ड लंबे समय तक क्रिकेट की दुनिया में शीर्ष पर रहा। उनकी इनस्विंग और आउटस्विंग गेंदों को पढ़ना दुनिया के बड़े से बड़े बल्लेबाजों के लिए एक पहेली की तरह था। विशेष रूप से उनकी 'रिवर्स स्विंग' ने उन्हें डेथ ओवरों का सबसे खतरनाक गेंदबाज बना दिया था।
1992 विश्व कप के नायक
अकरम की महानता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1992 के विश्व कप फाइनल में उनकी दो जादुई गेंदों ने मैच का पासा पलट दिया था और पाकिस्तान को विश्व विजेता बनाया था। 502 विकेटों के इस विशाल पहाड़ को बाद में श्रीलंका के मुथैया मुरलीधरन ने पार किया, लेकिन एक तेज गेंदबाज के रूप में आज भी अकरम का प्रभाव और आंकड़े बेमिसाल हैं।
अकरम का करियर न केवल विकेटों के लिए, बल्कि उनकी खेल के प्रति समझ और नई गेंद के साथ उनकी कलाकारी के लिए भी याद किया जाता है।






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